Wednesday, February 12, 2025

|| संत गुरु रविदास जी ||

सन्त गुरु रविदास जी हिन्दू समाज के महान् स्तम्भ थे. वह एक सन्त ही नहीं अपितु महाज्ञानी और योगी भी थे. उनका जन्म माघ मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा को वाराणसी जिले में हुआ था. चँवर पुराण के अनुसार चँवर वंश, सूर्यवंशी क्षत्रिय राजवंश था जिसकी स्थापना महाराज चँवर सेन ने की थी, जिसमें सूर्य सेन एवं चामुण्डा राय बड़े शक्तिशाली राजा हुए थे।

धर्मान्ध मुस्लिम शासक सिकन्दर शाह लोधी द्वारा उन्हें ही नहीं बल्कि उनके पूरे परिवार को चमार बना दिया गया. राज आज्ञा के कारण कोई भी उनको सहायता देने में अक्षम हो गया. यह घटना ऐसी घटी कि संत रविदास जी मुसलमानों को हिन्दू बनाने का काम कर रहे थे।

परम् पूज्य सन्त रामानंद जी, रविदास जी के गुरु थे. जब सन्त रविदास जी ने सदना कसाई को हिन्दू समाज में प्रवेश दिलाकर रामदास बनाया तब सिकन्दर शाह लोधी बहुत क्रोधित हुआ और उसने सन्त रविदास जी को बुलाया और उन्हें मुसलमान बनने को कहा। रविदास जी ने साफ़ मना कर दिया तो उसने उन्हें पाँच जागीर देने का प्रलोभन दिया. सिकन्दर ने रविदास जी को मुसलमान बनाने के लिए अनेक प्रयास किये. लेकिन वो सफल नहीं हो पाया। तब सिकन्दर ने रविदास को जेल में डाल दिया. जेल में भगवान श्री कृष्ण ने इन्हें साक्षात दर्शन दिये. दूसरी ओर सिकन्दर बहुत बेचैन था. उस ने रविदास जी को जेल से रिहा तो कर दिया लेकिन साथ में यह आज्ञा दी कि उनका पूरा कुनबा और उनकी शिष्य मण्डली वाराणसी के आस-पास मरे हुए पशुओं को उठाए।

सन्त रविदास जी एवं उनके शिष्यों ने मरे हुए पशुओं को उठाना स्वीकार किया लेकिन अपना हिन्दू धर्म का त्याग कर के मुसलमान बनना स्वीकार नहीं किया। इसके पश्चात् ही उन्हें चमार की संज्ञा प्राप्त हुई. इस प्रकार इस पुनीत एवं उच्च कुलीन वंश को चमार बनना पड़ा. अपने प्रारम्भिक जीवन और बाद के जीवन में महान् अन्तर पर स्वयं सन्त रविदास जी अपने एक भजन में कहते हैं।

|| जाके कुटुम्ब सब ढोर ढोवत आज बनारसी आसा पासा,

आचार सहित लोग करहिं दण्डवत तिन,

तनै रैदास दासानुदासा ||

अर्थात् --

जिसके कुटुम्बी आज वाराणसी के आस-पास मरे पशु उठाते हैं ? ये वो लोग हैं जिनके पूर्वजों को लोग आदर सहित दण्डवत प्रणाम किया करते थे. उन्हीं महान् लोगों का पुत्र दासों का दास मैं रविदास हूँ।

इन शब्दों में कितनी बेबसी झलकती है. यह तथ्य इतिहास के इस उल्लेख से और सिद्ध हो जाता है कि राजस्थान की रानी गुरु-दीक्षा लेने रविदास जी के आश्रम में गयी. वहां का उच्च कुलीन सौंदर्य और शालीनता पूर्ण व्यवहार देख कर गुरु रविदास जी से दीक्षा लेने को तैयार हो गई। इस घटना से भी यह तथ्य उजागर होता है कि रविदास जी का वंश और शिष्य परम्परा उच्च कुलीन थी. भारत भ्रमण के समय चितौड़ की रानी मीराबाई ने भी उन्हें अपना गुरु बनाया।

सन्त रविदास जूते बनाने का काम किया करते थे. वे जूते बनाते समय इतने मग्न हो जाते थे जैसे स्वयं भगवान के लिए बना रहे हों. वे भगवान की भक्ति में समर्पित होने के साथ अपने सामाजिक और पारिवारिक कर्तव्यों का भी बखूबी निर्वहन किया. इन्होंने लोगों को बिना भेदभाव के आपस में प्रेम करने की शिक्षा दी, और इसी प्रकार से वे भक्ति मार्ग पर चलकर सन्त रविदास कहलाए।

उनके द्वारा दी गई शिक्षा आज भी प्रासंगिक है. मन चंगा तो कठौती में गंगा उनका यह प्रसंग बहुत लोकप्रिय है. इसका अर्थ है कि यदि मन पवित्र है और जो अपना कार्य करते हुए, ईश्वर की भक्ति में तल्लीन रहते हैं उनके लिए उससे बढ़कर कोई तीर्थ स्नान नहीं है।

|| रविदास जन्म के कारनै, होत न कोउ नीच. नकर कूं नीच करि डारी है, ओछे करम की कीच ||

इसका अर्थ है कि कोई भी व्यक्ति छोटा या बड़ा अपने जन्म के कारण नहीं होता बल्कि अपने कर्म के कारण होता है. व्यक्ति के कर्म ही उसे ऊँचा या नीचा बनाते हैं।

सन्त रविदास जी कहते हैं कि कभी भी अपने अंदर अभिमान को जन्म न लेने दें. एक छोटी सी चींटी शक्कर के दानों को उठा सकती है लेकिन एक हाथी इतना विशालकाय और शक्तिशाली होने के पश्चात् भी ऐसा नहीं कर सकता। 

|| करम बंधन में बन्ध रहियो, फल की ना तज्जियो आस। कर्म मानुष का धर्म है  ||

अर्थात् कर्म हमारा धर्म है और फल हमारा सौभाग्य. इसलिए हमें सदैव कर्म करते रहना चाहिए और कर्म से मिलने वाले फल की आशा नहीं छोड़नी चाहिए. वे सभी को एक समान भाव से रहने की शिक्षा देते थे।

अकथनीय कष्टों को झेलते हुए भी हिन्दू धर्म की पताका उठाये रखने और सनातन धर्म को हर प्रकार से सशक्त प्रदान करने वाले ऐसे सन्त शिरोमणि गुरु रविदास जी के श्री-चरणों में हमारा शत्-शत् नमन्।

Tuesday, February 11, 2025

Happy Chocolate Day – February 9, 2025

Chocolate Day Is One Of The Most Loved Days Of Valentine’s Week, Celebrated On February 9th. This Day Is All About Adding Sweetness To Relationships By Gifting Chocolates To Loved Ones. Chocolate Is Often Considered A Symbol Of Love, Happiness, And Comfort, Making It The Perfect Way To Express Emotions, Whether It's Romantic Love, Friendship, Or Appreciation.

On This Day, Couples Exchange Chocolate Boxes, Handmade Chocolates, Or Luxury Chocolate Hampers As A Gesture Of Love. Friends And Family Members Also Take Part In The Celebration By Sharing Their Favorite Treats. Many People Also Plan Chocolate-Themed Surprises Like Baking A Chocolate Cake Together, Enjoying A Chocolate Fondue Date, Or Even Gifting Personalized Chocolates With Heartfelt Messages.

Different Chocolates Carry Different Meanings:
 Dark Chocolate – Represents Deep Love And Passion
 Milk Chocolate – Signifies Sweetness And Care
 White Chocolate – Symbolizes Pure And Innocent Love
 Assorted Chocolates – A Mix Of Emotions And Surprises In A Relationship

Whether You're Confessing Love For The First Time, Strengthening A Bond, Or Simply Bringing A Smile To Someone’s Face, Chocolate Day Is A Sweet Way To Make Someone Feel Special. After All, "Life Is Like A Box Of Chocolates – Full Of Surprises And Love!"

 

Happy Propose Day – February 8, 2025

Propose Day Is The Second Day Of Valentine’s Week And Is Dedicated To Expressing One’s Deepest Emotions To Someone Special. Whether It’s A Romantic Proposal To A Crush, A Heartfelt Confession To A Partner, Or Even A Grand Marriage Proposal, This Day Holds Immense Significance For Couples And Lovebirds. Many Choose To Propose With A Ring, A Bouquet Of Roses, A Handwritten Letter, Or A Thoughtful Surprise, Making The Moment Extra Special And Memorable.

For Those In Love, Propose Day Is The Perfect Opportunity To Take A Step Forward In Their Relationship, While For Others, It’s A Chance To Express Their Feelings For The First Time. Some Prefer Grand Gestures, Such As Proposing At A Romantic Destination Or With A Flash Mob, While Others Opt For A Simple Yet Meaningful Approach, Like A Quiet Dinner Date Or A Heartfelt Message.

No Matter How One Chooses To Propose, The Essence Of Propose Day Lies In The Sincerity And Warmth Of Emotions. It Is A Celebration Of Love, Commitment, And The Courage To Open One’s Heart. Whether The Answer Is "Yes" Or Not, The Courage To Express Love Is What Truly Matters!